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July-September, 2023

01. Front Page, Preface and Index

Research is a conscious, reliable novel commitment in data. Inside the last 20 to 25 years, courses in systems for social assessment have come to have a clearly key work in humanistic illuminating plans. It likely that at present every…

  1. Comparative Analysis of Credibility of Print Media and social media

Guarav Kumar

Credibility of media comprises of the objective and subjective components of the believability of a source or message. Credibility has two components trustworthiness and expertise, which both have objective and subjective components...

  1. Impact of social media on Traditional Marketing and Advertising

 Reeta

One thing while watching television that bothers most people is an advertisement. It breaks the rhythm and forces the viewer to wait for it to end. But what most viewers don’t see is how much effort is put into that short piece of work. Advertisements not only try to capture…

  1. Usage of Social Networking Sites on Youth

Deep Shikha

The study aims to understand the usage of social networking sites on youth. The youth at largehave started to widely make use of social networking sites.  In this research paper the survey method has been used and questionnaire has been used for a data collection. The paper in itself is based…

  1. To Study the Purchasing Trend of Product in Youth

Dr. Prashant Kumar Rai

In this research researcher find out that the purchasing trend of product in youth is not fully change to the online shopping because they still believe in face to face shopping rather than online shopping without checking the products. researcher also find out from my research that more of the male respondent shop online than female respondent. Male respondent finds it easy to buy online than from market…

  1. यू-ट्यूब पर उपलब्ध शैक्षणिक सामग्री का स्कूली छात्रों पर प्रभाव: एक अध्ययन

निरंजन कुमार                                                                    डॉ. रमेश यादव  

यू-ट्यूब, सोशल मीडिया  के रूप में एक शक्तिशाली प्लेटफोर्म है जो पहुंच,  जुड़ाव,  वैयक्तिकरण और सहयोग को बढ़ाकर शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है। वर्त्तमान  में  डिजिटल  मीडिया  का  उपयोग शिक्षा  के  हर  स्तर  व  क्षेत्र  में  व्यापक  रूप  से  किया  जा  रहा है.  इसमें  प्री-स्कूलिंग  से  लेकर  यूनिवर्सिटी  तक  की  शिक्षा  शामिल है. और  इस  सब  के  लिये हर  डिजिटल  माध्यम में  शिक्षा सामग्री का प्रस्तुतकर्ता …

  1. छत्तीसगढ़ में पर्यटन उद्योग की संभावनाएं एवं मीडिया की भूमिका

रेशमी

छत्तीसगढ़ पर्यटन ने मध्य प्रदेश विभाजन के बाद 1 नवंबर सन 2000 के बाद से प्रगति की है पर्यटकों के आवागमन में छत्तीसगढ़ अपना महत्वपूर्ण हिस्सा दे रहा है आज पर्यटन सबसे बड़ा सेवा उद्योग बन गया है. यहाँ पहले कछुआ चाल की आपेक्षा अब विकास की ओर अग्रसर हो रहा है, इस सभी कार्य को आगे बढ़ाने के लिए मीडिया की हम भूमिका रही है. आज हर पर्यटन के क्षेत्र जैसेः- ऐतिहासिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक…

  1. प्रकृतिवासी एवं सभ्यवासी : एक मानवशास्त्रीय विश्लेषण

महेंद्र कुमार जायसवाल

प्रकृति अपने आप में एक सार्वभौमिक वैज्ञानिक व्यवस्था है, जिसमें विज्ञान और धर्म दोनों संयुक्त रूप से समाहित है। प्रकृति की शक्ति और सुकून देने वाली अद्भुद शांति, ऊंचे-ऊंचे पेड़, आईने की तरह शांत ताल, कल-कल करती नदियाँ, सब मिलकर एक नयी मनुष्य से अनछुई दुनिया, वनस्पति और जीव-जंतुओं का अद्भुत संसार स्वर्गमय मालूम होते थे। जनजातीय समूहों…

  1. गोरखपुर के नागरिकों द्वारा ई-गवर्नेंस के प्रति जागरुकता एवं प्रयोग का अध्ययन

अभय शुक्ला

बीसवीं सदी के अंतिम दौर और 21वीं सदी के प्रारंभ से ही दुनिया भर में बड़े बदलाव देखने को मिले है। इनमें से कुछ ऐसे बदलाव हैं जो दुनिया और समाज को कुछ इस प्रकार प्रभावित किए हैं कि दुनिया का स्वरूप ही बदल दिया है । ऐसा ही एक परिवर्तन इंटरनेट युग ने भी लाया है इंटरनेट का आविष्कार ही दुनिया में एक मैं वैश्विक परिवर्तन के साथ-साथ वैश्विक एकजुटता ग्लोबल विलेज…

  1. हिंदी पत्रकारिता: वर्तमान चुनौतियां एवं समाधान

डॉ. संजीव कुमार

हम सभी हिंदी को अपनी राष्ट्रभाषा मानते हैं। राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय हिंदी दिवस पर दूसरी भाषाओं को खूब कोसते भी हैं। पर यही कोसने वाले लोग हिंदी विषय के विद्यार्थियों को नौकरी नहीं देना चाहते। देश में 44% लोग हिंदी बोलने और जानने वाले हैं। हिंदी के बलबूते ही बॉलीवुड अरबों खरबों का व्यापार करता है। हिंदी पत्रकारिता भी उन्हीं में से एक है। देश में सबसे ज्यादा हिंदी भाषा में ही समाचार पत्र

  1. मलयालम साहित्य की स्वच्छंदतावादी परंपरा और बालमणि अम्मा

डॉ. मनीष कुमार चौधरी

भारतीय साहित्य भारतीय भाषाओं का साहित्य है। भारतीय भाषाओं की विविधता और अनेकता की सम्पूर्ण अभिव्यक्ति भारतीय साहित्य की चेतना द्वारा ही संभव है। वह चेतना जो अलग-अलग भाषाओं में अभिव्यक्ति पाती हुई भी अपनी मूल प्रकृति में भारतीय है। जब हम भारतीय साहित्य की बात करते हैं तो अनेक भाषाओं की भी बात करते हैं। भाषा का साहित्य बहुत प्राचीन रहा है। हिन्दी के समानांतर

Ram Shankar
DR. RAMSHANKAR M.PHIL., ICSSR-DRF, NET, PH.D., CHIEF EDITOR-THE ASIAN THINKER JOURNAL (ONLINE)